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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 116, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 116 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

पश्याम्बरं बलवदम्बुधराब्धिपूर्णं पश्याम्बरं तरलतारकतारहारम् । पश्याम्बरं सुघनसक्तमसैकसारं पश्याम्बरं विशदचन्द्रकरावसिक्तम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस पर्वत की मेचसदृश कदम्बवनरूपी कम्बल को धारण कर रही सूर्य के मार्ग को चूमनेवाली शिखर भूमियाँ शोभा पा रही हैं । अतः इन भूमिय मे मेरी भूमि की तरह ही ये भी भूमियाँ ही हैं ऐसी आपकी बुद्धि हो, ये सूर्य को ढकने वाली आकाशस्थ मेघराशियाँ हैं, ऐसी शंका आप न करें