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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 117, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

आमोदमन्दमकरन्दकरालवातव्याधूतपङ्कपुटपाटनपाटवेन । उद्यन्महापटपटा वयतीव लेखा क्षुभ्यत्खगाश्रितलतोज्झितपुष्पवर्षम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज, बलवान्‌, मेघरूपी सागर से भरे हुए आकाश को देखिये, चंचल तारेरूपी लम्बे हार से युक्त आकाशपर दृष्टिपात कीजिये, खूब घने अन्धकार के तुल्य काले आकाश को देखिये तथा निर्मल शुभ्र चन्द्रकिरणों से धवलित आकाश को देखिये