Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
चञ्चवग्रे खञ्जरीटस्य कीटः किटिकिटायते ।
दौर्भाग्यस्य पुराणस्य पताकेवोच्छ्रितोन्नते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
पवित्र हृदय के समान निर्मल कमलों से भरा हुआ हृदय को अत्यन्त आनन्द
देनेवाला जलपूर्णं यह मधुर सरोवर पवित्र (निर्मल) हृदयकमलवाले, हृदय को अत्यन्त आह्नादित
करनेवाले, प्रीतिपूर्णं तथा अत्यन्त मधुर सत्संग के तुल्य है