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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

बकाजगरमद्गूनां हृदि या प्राणिनां धृतिः । अचर्वितनिगीर्णानां मन्ये निद्रोपमैव सा ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

हेमन्त ऋतु में इस सरोवर की केसी दशा होती ह 2 इस प्रश्न पर कहते हैं / हेमन्त ऋतु में सुन्दर सारसों से पूर्ण यह सरोवर हेमन्त ऋतु के मेघों की तरह शोभित होता है, कुहरे से चारों ओर धिरे रहने के कारण कुछ-कुछ दिखाई देता है; कुहरा इसे अपने रंग में रंग लेता है, अतएव इसकी कालिमा चली जाती है ओर जलबिन्दुओं से इसकी हवा अति कठोर बन जाती है