Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 118, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
इति हावभावविलसितविवलनकोपार्धदृष्टिहसितानि ।
कुर्वाणा वरवनिता कथयति ते दृश्यतां राजन् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
राजन्, इस
सरोवर का राजा का सा ठाट-बाट है । देखिये न, वायुवश हिल रहे महाकमल और पल्लवरूपी
पंखों से यह संवीजित (झला गया) है, सुन्दर फेन ही इसके डुलाये गये चँवर है, भौरि ओर कोयल
अपने गीतों से इसका गान करते हैं तथा कमललतारूपी सुरूप, सुडौल, सच्चरित्र तथा सुन्दरी
अनेक ललनाओं से यह घिरा है