Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तदा तत्रैव ते वासभूमिं कृत्वा यथाक्रमम् ।
तस्थुर्मण्डलमर्यादां स्थापयामासुरक्षताम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
क सहवर दिविध वायुओं का वर्णन करता ह /
केले के गोफों के सुन्दर गुच्छों को फुलाने में पण्डित तथा फूलों के परागों से विभूषित ये अनेक
प्रकार के वायु बहते हैं