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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

आययौ यामिनीश्यामा मेघलेखेव तानवम् । संपादिताहर्व्यापारास्तस्थुः स्वशयनेषु ते ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

कुछ पर्वतों के गुफारूपी गृहों में पैठकर घुमने में उद्योगी सिंहों की तरह क्षार समुद्र के वायु, राक्षसों के-से सुमेरु शिखराक्रमण के उद्योगों से बहते हैं