Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
कियती स्यात्प्रविस्तीर्णा दृश्यश्रीरियमातता ।
इतः समुद्रस्तदनु द्वीपभूरम्बुधिः प्रभुः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
बाँसों के वन
में विश्राम लेता हुआ यह वनवायु हस्तिनापुर की नारियों से सिखलाया गया हुआ-सा मीठा गाना
गाने के लिए तैयार हुआ है