Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 123, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 123, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 123 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
क्रौञ्चद्वीपाचले पूर्वो निगीर्णो रक्षसा वने ।
तद्रक्षः पाटितं तेन हृदयेऽन्त्रविकर्तनैः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
वे मन्त्र, विद्या, बल और तेजस्विता से दुर्जय थे तथा हाथ में शस्त्र लिए हुए
थे, अतएव कहीं पर मस्त मगरों ने पहले उनके शरीरो को निगला फिर पचाने की शक्ति न होने से
उगल दिया