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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 124, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

एकदेशगता विष्वग्व्याप्य कर्माणि कुर्वते । योगिनस्त्रिषु कालेषु सर्वाण्यनुभवन्त्यपि ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त अणिमा आदि ऐश्वर्य के प्रताप से ही मगर और जलगजों द्वारा पहले निगली फिर उगली गई मूर्तिवाला वह अनेकानेक द्रीप- द्वीपान्तर के कुलशैलों को लाँघ गया