Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 128, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 128, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 128 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अनादिमध्यपर्यन्ते तस्मिन्ब्रह्ममहाम्बरे ।
महाचिन्नाम्नि सर्वात्मन्ययोनिर्वाणरूपिणि ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
लोकालोक पर्वत के परले पार स्थित आकाशमण्डल से अतिदूर चारों ओर नक्षत्रमण्डल
परिभ्रमण करता है