Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 129, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 129 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
क्षिप्रेण शान्ता भवति विज्ञानालोक आगते ।
अमूलमेव गलति तिमिरश्रीरिवोदये ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त ब्रह्माण्ड के आवरणभूत
जल से बाहर जल से दसगुना आकाश के समान देदीप्यामान इन्धनशून्य तेज स्थित है