Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 129, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 129 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तदेवाश्वपरिज्ञातं मिथ्या विद्येति कथ्यते ।
परिज्ञातं तु तच्छान्तं तथा ब्रह्मेति कथ्यते ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
खूब अभ्यस्त पूर्व संस्कार से
(दिगन्तदर्शनउद्योग के संस्कार से) सम्पन्न उस प्रकार के सजीव निश्चय से प्रित विपश्चित् लोकालोक
पर्वत के शिखर से परे पूर्वोक्त अन्धकार गर्त में प्रविष्ट हुआ