Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
दिशो दश सुवेगेन दुद्रावाभिद्रुतोऽरिभिः ।
न विश्रामास्पदं प्राप परलोक इवाधमः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
और शत्रु उसके पीछे-पीछे दौड़ने लगे । शत्रुओं के पीछा
करने पर दसों दिशाओं में बड़ वेग से भागते हुए उसने कहीं पर भी अपने विश्राम का स्थान ऐसे नहीं
प्राप्त किया जैसे पापी पुरुष उत्तम परलोक नहीं प्राप्त करता