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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 132, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

विद्याधरामरविहारविमानभूमावभ्रंलिहाचलनितम्बकदम्बकच्छे । आसं समाः समरसोऽमरसोमनामा सप्तान्यसप्त ससमुद्रतटे तपस्वी ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

भूगोल के नीचे की ओर के जो अंग हैं और ऊपर की ओर के जो अंग हैं उनमें प्रवेश कर जहाँपर जो जीव जब रहते हैं, तब वे वहाँपर भ्रमण करते हैं