Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 140, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 140, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 140 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अथैकार्णवखातोऽसावभवच्छुष्ककोटरः ।
क्वचिद्गलितसह्याद्रि क्वचित्संशीकमन्दरः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
नाड़ियों के अन्नरस आदि से पूर्ण होने
अथवा श्रमवश कमजोर हो जानेपर जब प्राण गतिरहित हो जाता है तब सुषुप्ति का उदय होता हे