Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 144, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 144 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
सरोब्धिकूपमेकानां दृष्टाः प्रत्येकमास्पदे ।
न तेऽन्योन्यं विदन्त्यन्यां दृश्यादिनियतिं क्वचित् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा क्यो होता है ? इस शंकापर चूँकि परिशिष्ट ब्रह्म दृश्यक्षय नामका धर्मकर्म से शून्य है, ऐसा
कहते हैं।
जिसमें यह सृष्टि नाममात्र को भी नहीं है उसमें सृष्टि के धर्म, कर्म और उनके बोधक पद, वाक्य
आदिरूप अक्षरमालिका कहाँ से होगी, अर्थात् नहीं है