Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 149, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
इत्याकर्ण्य समालोक्य स्मयमान इवोन्मनाः ।
स उवाच वचो वन्द्यममृतस्यन्दसुन्दरम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
सृष्टि के आरम्भ में चिदाकाश का अविनश्वर भान ही जगत् हे । अतएव सूक्ष्म चिति ही वस्तुसत्ता का
यथेष्ट विस्तार करती है