Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 150, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
स्वप्न में कार्य-कारणरूप क्रम से उदित वस्तु केवल चिति का
भान ही हे ऐसा निर्णय जाग्रतनामक स्थूल प्रपंच का भी समान ही हे । इस कारण ब्रह्यवेत्ताजन सारा-
का-सारा प्रपंच परम ब्रह्म ही है, ऐसा जानते हैं