Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 151, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत्रैवं भस्मतां प्राप्ते सुप्ते ते भवतस्तव ।
तनू तथातिसंतापविदारितमहाशिले ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके पश्चात् मैंने उनका पल्ला
नहीं छोड़ा । चिर प्रार्थना, भक्ति, अनुगमन आदि गुणों से वशीभूत हुए उन मुनि महाराज ने
आत्मविचारशून्य होने के कारण एक तरह से मृततुल्य (५) मेरे घर में मेरी तरह ही निवास किया