Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 152, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 152, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 152 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
इदमित्थं यदाभोगि स्फुटं स्वप्नजगन्मुने ।
सदेवानुभवत्येव तत्र संदिग्धता कथम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, इस कारण आपको वे दोनों शरीर प्राप्त नहीं हुए। आप जिसका कोई पारावार
नहीं हे ऐसे स्वप्नसंसाररूपी इस जाग्रत् में स्थित हैं