Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 156, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
इति चिन्तयतस्तत्र विदूरथमहीभुजा ।
भविष्यति महद्युद्धं चतुरङ्गबलक्षयि ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तपस्या करते हुए उसने किसी समय फिर उन मुनि
महाराज से प्रश्न किया : हे मुने ! मेरी आत्मा में विश्रान्ति कब होगी ? इस पर मुनिजी ने उससे कहा