Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 156, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
तव पूर्वोक्त रक्तरहित भगवती
काली मातृमण्डल के साथ उस शरीर को पूर्ववर्णन के अनुसार गणोंसहित खा जायेगी, इससे भूमि
निर्दोष हो जायेगी