Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 157, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 157, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 157 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
बहूनि तव जन्मानि समतीतानि तान्यहम् ।
विविधानि विचित्राणि वीर जानामि नो भवान् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
सिन्धु कहेगा :
मन्त्रिवर, यदि ऐसा है तो मैं भी सदा ही देवी की पूजा करता हू । फिर वह परमेश्वरी मुझे मोक्ष क्यों
नहीं देती ?