Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 158, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 158 · श्लोक 27
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हिन्दी अर्थ
सिन्धु कहेगा : यह प्राक्तन अधम तामसतामसी जीवजाति
किस उपाय से दवाई जा सकती है । हे आर्य, उस उपाय को कहिये । यदि वैसा कोई शोधक प्रकार
होगा तो मैं जीवनभर उसी प्रकार से रहूँगा। अतएव कृपया उसे कहिये