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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verses 60–63

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 160, verses 60–63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 60

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

पूर्णदृष्टि होनेपर तत्त्वज्ञता और अज्ञता का भेद भी नष्ट हो जाता है, ऐसा कहते हैं । पूर्णदुष्टि होनेपर ज्ञानिता ओर अज्ञानिता तथा सत्‌ ओर असत्‌ का भेद कुछ नहीं है पूर्णरूप सतुब्रह्म मे सत्‌ ओर असत्‌ तुल्य हे । इसलिए सब कुछ काष्ठवत्‌ मौन है । यानी चिद्रूप हे