Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 160, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 160, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 160 · श्लोक 69
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
सृष्टि के आदि में सृष्टिशोभा कैसे भासित होती है ? इस पर कहते हैं।
चिदाकाशमयी सृष्टि भी सृष्टि के आदि में स्वप्न की तरह भासित होती है, अतः यह सारा दृश्य
शान्त ब्रह्म ही है, यह उपपन्न होता है