Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 163, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 163, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 163 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
सत्यावलोकनाच्छान्तिमेति संसारसंभ्रमः ।
मराविव जलज्ञानं मिथ्यापतनदुःखदम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र शुद्ध बोधरूप आत्मविश्रान्ति द्वारा जीव में प्रसिद्ध
मनोविक्षेप का त्याग कीजिये, जो अपने आप मिथ्या ही उदित हुआ है