Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 164, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

यथैकद्रव्यनिष्ठे हि चित्तेऽन्यद्रव्यसंविदः । न भवन्ति परे तद्वन्नान्यास्तिष्ठन्ति संविदः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त को इन्द्रियसेना का सेनापति कहते हैं यानी वह इन्द्रियों का स्वामीरूप से संचालक और निरोधक है, इसलिए उसपर विजय पा लेने से इन्द्रियोपर विजय प्राप्त हो जाती हे । जिसके पैर चर्ममय जूते आदि से सुरक्षित होते हैं उसके लिए सारी पृथ्वी चर्मावृत हो ही जाती है