Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 172, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 172, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 172 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
स्थिता एवात्मनि तथा सर्वाः सर्वात्मिका विदः ।
मिथ्याज्ञानमया यद्वदर्था घटपटादयः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मणि अपने से अभिन्न अपनी आभा से स्फुरित होती है वैसे ही
चिदाकाश अपने से अभिन्न सृष्टिरूप से स्फुरित है