Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 39
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हिन्दी अर्थ
चिदाभास द्वारा जब जिस जिसका जिस प्रकार से-भाव अथवा अभाव रूप से जैसा संकल्प
किया जाता है उसका उस प्रकार से चाहे वह सत् हो चाहे असत् वैसे ही अनुभव किया जाता
है