Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 176, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 176, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 176 · श्लोक 66
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हिन्दी अर्थ
इसलिए सद् ब्रह्म सर्वात्म है, इसमें क्या नहीं है ? वह ब्रह्मसत्ता ही सर्वात्म है
इस कारण यह सब कुछ ब्रह्मसत्तात्मक (सदात्म) और सर्वात्मक है