Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 178, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 178, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 178 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
संविन्मयत्वाज्जगतां तेषां भूम्यचलादि तत् ।
सर्वं चिदात्मकं विद्धि नौ चेदन्यत्किमुच्यताम् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा कहते हैं।
जैसे साम्प्रतिक अनन्यभूत परमात्मा में सृष्टिरूप परमात्मा का भान होता है वैसे ही चित् में चिन्मय
शब्द और उनके अर्थभूत सर्गो का चित् से ही भान होता है