Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 179, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 179, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 179 · श्लोक 32
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हिन्दी अर्थ
उनके वियोगजन्य दुःख से व्याप्त हुए उनके उन पुत्रों ने उनका ओध्वदेहिक संस्कार
कर लोकव्यवहार का परित्याग कर समाधि के लिए वन का मार्ग पकड़ा