Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 18, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 18, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । पश्य मे पुर उह्यन्त इति वाक्यार्थमक्षतम् । न किंचिदवगच्छामि यथावन्मुनिनायक ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त अर्थ की असंभावना करते हुए श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं / श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिनायक, "पश्यमे पुरः उह्ान्त' इस वाक्य का पूर्ण अर्थ मैं कुछ भी नहीं जान रहा हूँ। अतः कृपाकर मुझे ठीक-ठीक समझाइये