Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 182, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 182, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 182 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत्स्पर्शामृतसिक्तोऽयं कदम्बतरुपुत्रकः ।
उत्सङ्ग इव चासीनो न यात्येव पुराणताम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
क्रम से अपने आवासस्थानो का वर्णन करते हैँ ।
रोध नामक गाँव में पहुँचकर आम के वनों की अधिकतावाले पर्वत पर विश्राम कर हम लोग दो
दिन प्रसिद्ध सालीस नाम के नगर में सुखपूर्वक रहे