Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 183, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 183, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 183 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
वयं किलेमे भगवन्वराः शापाश्च सर्वदा ।
ननु संविन्मया एव देहोऽन्योऽस्माकमस्ति नो ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
वे आटो पलिनर्यो इनके तपस्या
के लिए चले जाने पर चिरकालतक अति दुःखी रहीं, क्योकि स्त्रियों को वियोग असह्य होता ही
हे