Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 184, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 184 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
परमार्थाम्बराम्भोधावापः सर्गपरंपरा ।
परमार्थमहाकाशे शून्यता सर्गसंविदः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
वर कहेंगे : आप लोगों का निर्माण मुनिजी
ने (दुर्वासा) किया है और हमारी रचना सूर्य ने की है। भगवान् सूर्य मुनियों की अपेक्षा श्रेष्ठ हैं, क्योंकि
पहले ब्रह्मा ने भगवान सूर्य की मुनियों से सृष्टि की