Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 184, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 184, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 184 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
संकल्पस्य वपुर्ब्रह्म संकल्पकचिदाकृतेः ।
तदेव जगतो रूपं तस्माद्ब्रह्मात्मकं जगत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
शापरूपी शत्रु के त्रिशूल उठाने पर उनका उपहास कर रहे
वे सम्यक् विचार द्वारा निश्चित अपने स्वार्थ का निश्चय कहेंगे