Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 186, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 186, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 186 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
चिता वेदनवेत्तारं स्थावरं क्रियते वपुः ।
चिता वेदनवेत्तारं जङ्गमं क्रियते वपुः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार प्रश्न का उपोद्घात करके अव प्रष्टव्य अंश कहते हैं।
वही यह मेरे समीप बैठा हुआ कुन्ददन्त नामक द्विज है, यही आज संशयरहित हुआ या नहीं यह
इससे कृपा कर पूछिये