Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 189, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 189, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 189 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
आतिवाहिकदेहोऽसौ स्रष्टुराद्यस्य भावितः ।
आधिभौतिकतां चैतत्पिण्डाकारं प्रपश्यति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देहधारिय मे शरेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार यह आतिवाहिक शरीर चिदाकाशभूत
चित्तशरीरवाला ओर आकाश से भी शून्य कहा गया है ।