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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । स्वसंकल्पेन चेत्योक्तं चिदित्यपरनामकम् । अनन्तं चेतनाकाशं जीवशब्देन कथ्यते ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

जीवशब्द से कहा जाता है