Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 19, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 19, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
मनोमात्रैकरूपात्मा प्रकृतेर्देह एष सः ।
एष पुर्यष्टकं प्रोक्तः सर्वस्यैवातिवाहिकः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
केवल
मनोमात्रस्वरूपात्मक यह जीव ही सबके उपादानभूत ईश्वररूप प्रकृति का शरीर है और यही
व्यष्टिरूप से सब जीवों का पुर्यष्टक (सूक्ष्म) शरीर भी कहा गया है