Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, कार्यकारणता का अभाव होने से ब्रह्म मे न तो भाव (उत्पत्ति) है
ओर न अभाव (प्रलय) ही, यह जो जगत् भासमान होता हे, जिसको भासमान होता है ओर जिस रूप
में भासमान होता है वह (ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेयरूपी त्रिपुटी) केवल आत्मा ही है