Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 39
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हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, हमारे सदृश जीवन्मुक्त लोगों के उपदेश आदि सकल व्यवहाररूप
से ब्रह्म ही ब्रह्म में स्थित है । बोधात्मा में (चिदात्मा में) न मोक्ष है, बन्धन है और न बन्धननिवृत्ति
के उपाय हैं । यानी भिन्नवत् दिखाई देनेवाले बन्ध, मोक्ष ओर मुक्ति के उपायों की तत्त्वदृष्टि से
अत्यन्त अप्रसिद्धि हे