Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 45
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हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, एकमात्र बोधस्वरूप हम लोगों की स्वरूपभूत जो बोधता है वही वायु
के स्पन्दन की तरह वैकल्पिक व्यपदेश से हम लोगों से अहम् ओर त्वम् कही जाती है अज्ञानवान्
अभिमानप्रधान पुरुष से नहीं कही जाती है