Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 80
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 80
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, जाग्रत्पदार्थ का स्वप्न में भान नहीं होता, किन्तु अन्य अर्थ ही
स्वप्न में भासता है किन्तु वह अन्य पदार्थ ब्रह्म ही है यह आपका अभिमत अर्थ मेरी समझ में आ गया
है । किन्तु इतना सन्देह अभी शेष है कि वह अन्य पदार्थरूप ब्रह्म जगत् सा कैसे भासता है ?