Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 88
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 88 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 88
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, आपके सदुपदेश से मैं यह मानता हूँ कि भ्रान्ति से द्रष्ट्रत्व और
भोक्तृत्व आदि सहित सृष्टि के जन्म, नाश आदि भ्रम परमपदरूप ब्रह्म मे काकतालीयन्याय से
अकस्मात उदित हुए हैं