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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 193, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 193 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

साहंतादिजगद्दृश्यमाशाकाशविसार्यपि । महाचिदुदरं विद्धि खं शान्तं शून्यतोदितम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त सुनिर्मल चिदाकाश का ही ये लोग हैं, ये पर्वत हैं इस प्रकार द्वैतरूप से भान हुआ है । निर्मल परमाकाश ही अनिर्मलसा होकर द्वैतरूप से स्थित है