Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
जैसे आपको स्वप्न में एक क्षण काल में
एकवर्षं की प्रतीति होती है वैसे ही उसे भी एक क्षण में वर्ष आदि कालविस्तार की भ्रान्ति होती है उसमें
वह काकतालीय के समान चन्द्र, सूर्य आदि को देखता है